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संध्यावन्दन क्रियाविधि वीडियो ! (Sandhya Vandan Procedure Video)

सभी सनातनी द्विजों के लिए करणीय, संध्योपासन कैसे करना है, इस के लिए यह वीडियो क्रियात्मक विधि की जानकारी देता है | त्रिकाल संध्या में प्रातः, मध्याह्न एवं सायं संध्या आती है | इनमें से न्यूनतम प्रातः संध्या तो प्रत्येक द्विज को करनी ही चाहिए, इसी उद्देश्य से यह वीडियो बनाया गया है | वक्ता …

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संध्या वन्दन आधार वीडियो ! (Sandhya Vandan Foundation Video)

सभी सनातनी द्विजों के लिए करणीय, संध्योपासन कैसे करना है, इस के लिए यह वीडियो आधारभूत जानकारी देता है | त्रिकाल संध्या में प्रातः, मध्याह्न एवं सायं संध्या आती है | इनमें से न्यूनतम प्रातः संध्या तो प्रत्येक द्विज को करनी ही चाहिए, इसी उद्देश्य से यह वीडियो बनाया गया है | वक्ता : अलङ्कार …

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श्रीमद् आञ्जनेय भुजङ्गप्रयात् स्तोत्र (Shri Mad Aanjaneya Bhujangprayat Stotra)

श्रीमदाञ्जनेय भुजङ्गप्रयातस्तोत्रम् अथ ध्यानम् मनोजवं मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वं अरोगता । अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद् भवेत् ॥ ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥ अथ स्तोत्रम् प्रपन्नानुरागं प्रभाकाञ्चनाभं जगद्भीतिशौर्यं तुषाराद्रिधैर्यम् । तृणीभूतहेतिं रणोद्यद्विभूतिं भजे वायुपुत्रं पवित्राप्तमित्रम् ॥ १॥ भजे पावनं भावनानित्यवासं भजे …

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चण्डिका दण्डक स्तोत्रम् Chandika Dandak Stotram

|| चण्डिका दण्डक स्तोत्रम् || ॐ नमः श्रीचण्डिकायै ऊं ऊं ऊं उग्रचण्डं च चकितचकितं चंचला दुर्गनेत्रं हूँ हूँ हूंकाररूपं प्रहसितवदनं खङ्गपाशान् धरन्तम्। दं दं दं दण्डपाणिं डमरुडिमिडिमां डण्डमानं भ्रमन्तं भ्रं भ्रं भ्रं भ्रान्तनेत्रं जयतु विजयते सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ १॥ घ्रं घ्रं घ्रं घोररूपं घुघुरितघुरितं घर्घरीनादघोषं हुं हुं हुं हास्यरूपं त्रिभुवनधरितं खेचरं क्षेत्रपालम्। भ्रूं भ्रूं भ्रूं भूतनाथं …

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गङ्गा स्तोत्रम् Ganga Stotram

॥ श्रीगङ्गास्तोत्रम् ॥ देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे । शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥ १॥ हे देवि गंगे! आप देवेश्वरि हो, हे भगवति! आप तीनों लोकों को तारने वाली, विमल और तरल तरंगमयी तथा शंकर के मस्तक पर विहार करनेवाली हो। हे माता ! तुम्हारे चरणकमलों में मेरी मति लगी रहे ॥१॥ …

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