निर्वाणदशकम् Nirvaanadashakam

॥ श्रीमद् आदिशङ्कराचार्य कृत निर्वाणदशकम् ॥ न भूमिर्न तोयं न तेजो न वायुर्न खं नेंद्रियं वा न तेषां समूहः ॥ अनैकांतिकत्वात्सुषुप्त्येकसिद्धस्तदेकोऽवशिष्टः शिवः केवलोऽहम् ॥१॥ मैं पृथ्वी नहीं हूँ, जल भी नहीं, तेज भी नहीं, न वायु, न आकाश, न कोई इन्द्रिय अथवा न उनका समूह भी। मैं तो सुषुप्ति में भी सर्वानुगत एवं निर्विकार रूप से स्वतः सिद्ध हूँ, सबका अवशेषरूप …

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