द्वादशपञ्जरिका स्तोत्र Dwadash Panjarika Stotra

‖ द्वादशपञ्जरिका स्तोत्र ‖ मूढ जहीहि धनागमतृष्णां कुरु सद्बुद्धिम् मनसि वितृष्णाम् | यल्लभसे निज कर्मोपात्तं वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ‖ 1 ‖ रे मूढ ! अपने धन एकत्रित करने की तृष्णा का त्याग कर, अपने मन को वितृष्णा की सद्बुद्धि में लगा । जो कुछ भी अतीत में किये गए कर्मों से प्राप्त हुआ है …

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