Aadi Shankaracharya

द्वादशपञ्जरिका स्तोत्र Dwadash Panjarika Stotra

‖ द्वादशपञ्जरिका स्तोत्र ‖ मूढ जहीहि धनागमतृष्णां कुरु सद्बुद्धिम् मनसि वितृष्णाम् | यल्लभसे निज कर्मोपात्तं वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ‖ 1 ‖ रे मूढ ! अपने धन एकत्रित करने की तृष्णा का त्याग कर, अपने मन को वितृष्णा की सद्बुद्धि में लगा । जो कुछ भी अतीत में किये गए कर्मों से प्राप्त हुआ है …

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चर्पटपञ्जरिका स्तोत्र CharpatPanjarika Stotra

॥ चर्पटपञ्जरिका स्तोत्र/ मोहमुद्गर ॥ दिनमपि रजनी सायं प्रातः शिशिरवसन्तौ पुनरायातः । कालः क्रीडति गच्छत्यायुः तदपि न मुञ्चत्याशावायु ॥ भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते । प्राप्ते सन्निहिते मरणे नहि नहि रक्षति डुकृञ् करणे ॥१॥ अग्ने वह्निः पृष्ठे भानू रात्रौ चिबुकसमर्पितजानुः । करतलभिक्षा तरुतलवासस्तदपि न मुञ्चत्याशापाशः ॥२॥ यावद् वित्तोपार्जनसक्तः तावन्निजपरिवारो रकतः । पश्चाध्दावति जर्जरदेहे …

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